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माघ मेला 2027: 900 हेक्टेयर में सजेगा प्रयागराज ‘टेंट सिटी’

प्रयागराज में माघ मेला 2027 की तैयारी शुरू हो गई है। 900 हैक्टेयर में सजेगा प्रयागराज।

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प्रयागराज: प्रयागराज में होने वाले 2027 के माघ मेले को लेकर प्रशासन ने तैयारियों का खाका तैयार करना शुरू कर दिया है। इस बार मेला क्षेत्र को बढ़ाकर करीब 900 से 925 हेक्टेयर करने का प्रस्ताव है। प्रयागराज को ‘टेंट सिटी’ बोला जाता है क्योकि वहा पे हर साल अस्थाई रूप से टेंट बनाए जाते है श्रद्धालुओं के लिए, सात की जगह आठ सेक्टर बनाए जाएंगे।


माघ मेला की आहट, प्रशासन ने शुरू की तैयारी


प्रयागराज में अभी माघ मेला 2027 आने में समय है, लेकिन संगम की पर इसकी तैयारियों की शुरुआत हो चुकी है। इसके लिए अलग-अलग विभागों को उनके काम और समय सीमा के साथ जिम्मेदारी दी जा रही है। 2027 का माघ मेला करीब 52 दिनों तक चलने वाला है। इस दौरान मकर संक्रांति, मौनी अमावस्या, माघी पूर्णिमा और महाशिवरात्रि जैसे प्रमुख स्नान पर्व होंगे। इन दिनों में श्रद्धालुओं की संख्या सामान्य दिनों के मुकाबले काफी बढ़ सकती है, इसलिए प्रशासन अभी से व्यवस्थाओं को मजबूत करने में जुट गया है।


माघ मेला क्षेत्र 900 से 925 हेक्टेयर तक बढ़ सकता है

प्रशासन ने पहली बैठक में ही साफ कर दिया है कि इस बार बढ़ती भीड़ को देखते हुए मेले की व्यवस्था को पिछले साल से ज्यादा बड़ा और व्यवस्थित किया जाएगा। इसके लिए अलग-अलग विभागों को उनके काम और समय सीमा के साथ जिम्मेदारी दी जा रही है। इस बार माघ मेले का क्षेत्रफल बढ़ाया जा रहा है, पहले करीब 844 हेक्टेयर में काम होता था पर इस बार 900 से 925 हेक्टेयर तक करने का प्रस्ताव है। मेले को इस बार आठ सेक्टरों में व्यवस्थित करने की योजना है, जबकि पहले सात सेक्टर थे। क्षेत्र बढ़ने के साथ सेक्टर बढ़ाने से भीड़ को अलग-अलग हिस्सों में बांटने और लोगों की आवाजाही को नियंत्रित करने में आसानी होगी।


आवागमन आसान करने के लिए बनेंगे नौ पांटून पुल

मेला क्षेत्र में आने-जाने वाले लोगों के लिए नौ पांटून पुल बनाने की योजना है। इनमें दो पुल अरैल की ओर बनाए जाने की बात सामने आई है। इसके अलावा पीडब्ल्यूडी से जुड़े कुल 54 टेंडरों की प्रक्रिया भी शुरू की जानी है। यानी मेले की तैयारियां केवल टेंट लगाने तक सीमित नहीं रहेंगी, बल्कि सड़क, पुल और दूसरी आधारभूत सुविधाओं पर भी काम होगा। माघ मेले में साफ पानी और सफाई सबसे बड़ी जरूरतों में शामिल हैं। प्रशासन की बैठक में पेयजल और जल निकासी की व्यवस्था पर भी चर्चा हुई। जल निगम के अनुसार मेला क्षेत्र में 80 बोरवेल उपलब्ध हैं।


भीड़ बढ़ी तो पार्किंग और सुरक्षा भी बढ़ेगी

मेले में भीड़ बढ़ने के साथ सबसे बड़ी चुनौती वाहनों और लोगों की आवाजाही को संभालना होती है। इसी को देखते हुए अतिरिक्त पार्किंग की व्यवस्था और ट्रैफिक प्लान तैयार किया जाएगा। सुरक्षा, अग्निशमन और निगरानी व्यवस्था को भी मेला क्षेत्र के विस्तार के हिसाब से मजबूत करने की तैयारी है। प्रशासन इस बार तैयारियों को आखिरी समय तक टालने के बजाय लगातार निगरानी की रणनीति पर काम कर रहा है। मंडलायुक्त ने हर गुरुवार साप्ताहिक बैठक कर तैयारियों की समीक्षा करने के निर्देश दिए हैं।


श्रद्धालुओं के लिए बनेगी अस्थायी ‘टेंट सिटी’

हर साल संगम के किनारे श्रद्धालुओं और कल्पवासियों के लिए अस्थायी टेंट सिटी बसाई जाती है। उत्तर प्रदेश सरकार के प्रयागराज जिला प्रशासन के अनुसार मेले में श्रद्धालुओं के लिए सुरक्षा, सफाई, स्वास्थ्य और अन्य जरूरी सेवाओं की व्यवस्था की जाती है। इस बार प्रशासन पुराने मेलों के अनुभव को भी नई योजना में शामिल करना चाहता है। अधिकारियों से 2013 के कुंभ से लेकर अब तक आयोजित मेलों से मिली सीख और सामने आई समस्याओं का नोट तैयार करने को कहा गया है। मकसद साफ है जहां पहले परेशानी हुई, वहां इस बार पहले से तैयारी की जाए।

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