प्रयागराज से जुड़े युवा पर्वतारोही अनंत सिंह ने लद्दाख की 7,077 मीटर ऊंची माउंट कुन चोटी पर तिरंगा फहराकर बड़ी उपलब्धि हासिल की है। अनंत सिंह ने यह बात की पुष्टि सोशल मीडिया पर वीडियो बनाकर कर किया है। इससे पहले वह कंग यात्से-2 चोटी भी फतह कर चुके हैं। उनका यह अभियान बेहद कठिन मौसम, कम ऑक्सीजन और बर्फीले रास्तों के बीच पूरा हुआ, और यह बेहद ही सराहनीय है।
प्रयागराज के युवा ने बढ़ाया शहर का नाम
प्रयागराज से जुड़े पर्वतारोही अनंत सिंह ने 7,077 मीटर ऊंची माउंट कुन चोटी पर पहुंचकर तिरंगा फहराया। सोशल मीडिया पर सामने आई जानकारी के मुताबिक, उन्होंने 22 अगस्त को यह उपलब्धि हासिल की। उनके इस अभियान के बाद प्रयागराज और आसपास के लोगों में खुशी का माहौल है। अनंत सिंह ने बताया था कि 22 अगस्त को सुबह 7 बजे उन्होंने यह लक्ष्य पूरा किया।
अनंत ने लद्दाख हिमालय पर भी किया फतह
जनपद के मुहम्मदाबाद गोहना ब्लॉक के बरसवा निवासी पर्वतारोही अनंत सिंह ने लद्दाख हिमालय की लगभग 6250 मीटर ऊंची कंग यात्से-2 फतह किया है। तब उनका अगला लक्ष्य 7077 मीटर ऊंचे माउंट कुन था और अब उन्होंने यह लक्ष्य भी पूरा कर लिया है। अनंत ने 2 अगस्त को कंग यात्से-2 अभियान शुरू किया था और 11 अगस्त को लेह लौटे थे। इसके बाद वह माउंट कुन अभियान की तैयारी में जुट गए थे।
जर्मन टीम के साथ जुड़े थे अनंत
भारतीय पर्वतारोहण फाउंडेशन (IMF) के आधिकारिक पत्र में अनंत सिंह को जर्मनी के 13 सदस्यीय पर्वतारोहण दल के साथ भारतीय संपर्क अधिकारी बनाए जाने की जानकारी दी गई थी। इस अभियान का नेतृत्व जर्मन पर्वतारोही स्टीफन कीफर कर रहे थे। माउंट कुन रिज अभियान की स्वीकृत अवधि 2 से 30 अगस्त 2026 बताई गई थी।
अनंत सिंह नेहरू इंस्टीट्यूट ऑफ माउंटेनियरिंग (NIM) से प्रशिक्षित हैं। रिपोर्ट के अनुसार, वह पर्वतारोहण प्रशिक्षक, स्की पर्वतारोही और खोज एवं बचाव प्रशिक्षक के तौर पर भी काम कर चुके हैं और उनके पास 12 से ज्यादा हिमालयी अभियानों का अनुभव है।
माउंट कुन कितनी ऊंची है?
माउंट कुन की ऊंचाई 7,077 मीटर है। यह नुन-कुन मासिफ की दूसरी सबसे ऊंची चोटी है और लद्दाख की जांस्कर रेंज में स्थित है। सरकारी रिकॉर्ड में भी माउंट कुन की ऊंचाई 7,077 मीटर दर्ज है। माउंट कुन का इलाका अपनी कठिन चढ़ाई और खराब मौसम के लिए जाना जाता है। यहां पर्वतारोहियों को ग्लेशियर, बर्फीली ढलानों और ऊंचाई से जुड़ी मुश्किलों का सामना करना पड़ता है।











