UP न्यूजUP electionप्रयागराज न्यूजबिजनेस स्पोर्ट्सइलाहाबाद यूनिवर्सिटी न्यूजएजुकेशनसरकारी योजना टेक - AI

---Advertisement---

रेलवे ने बनाया अनोखा बायो-टॉयलेट

रेलवे ने पुराने कोचों से निकले उपयोगी सामान को कबाड़ मानकर फेंकने के बजाय उसका दोबारा इस्तेमाल किया है। झांसी की सीएमएलआर वर्कशॉप ने इन्हीं पार्ट्स से चार छोटे स्टेशनों पर मॉड्यूलर बायो-टॉयलेट तैयार कर लगाए हैं।

---Advertisement---

प्रयागराज। रेलवे स्टेशनों पर यात्री सुविधाएं बढ़ाने के लिए हमेशा बड़े निर्माण की जरूरत नहीं होती। कभी-कभी पुराने सामान को नए तरीके से इस्तेमाल कर भी काम की सुविधा तैयार की जा सकती है। उत्तर मध्य रेलवे की झांसी स्थित कोच मिड-लाइफ रिहैबिलिटेशन (सीएमएलआर) वर्कशॉप ने कुछ ऐसा ही करके दिखाया है।

वर्कशॉप के कर्मचारियों ने पुराने रेल कोचों की मरम्मत के दौरान निकले उपयोगी सामान को दोबारा तैयार किया और उनसे मॉड्यूलर बायो-टॉयलेट बनाए। इन्हें ललितपुर जिले के माताटीला, जीरोन और जखोरा तथा मध्य प्रदेश के दतिया जिले के बसई स्टेशन पर लगाया गया है। ये सभी एनएसजी-6 श्रेणी के छोटे स्टेशन हैं।

पुराने पार्ट्स को नहीं समझा कबाड़

कोचों की आवधिक मरम्मत यानी पीरियोडिक ओवरहॉलिंग के दौरान कई ऐसे पार्ट्स निकलते हैं, जो पुराने होने के बावजूद दोबारा इस्तेमाल किए जा सकते हैं। रेलवे ने इन्हें सीधे कबाड़ में भेजने के बजाय उनकी उपयोगिता को देखते हुए फिर से तैयार किया।

इनमें एफआरपी टॉयलेट मॉड्यूल, बायो-टैंक, पानी की टंकियां और कोच के अन्य उपयोगी हिस्से शामिल थे। इस्तेमाल से पहले इनकी जांच की गई, सफाई हुई और जरूरत के मुताबिक मरम्मत व सुधार किया गया।

वर्कशॉप में ही तैयार हुआ पूरा ढांचा

इस पहल से रेलवे को नए सामान की खरीद पर पूरी तरह निर्भर नहीं रहना पड़ा। उपलब्ध पार्ट्स और वर्कशॉप के तकनीकी संसाधनों का इस्तेमाल करके कम लागत में यात्रियों के लिए जरूरी सुविधा तैयार की गई।

रेलवे की यह पहल ‘रीयूज़-रिफर्बिश-रीबिल्ड’ यानी पुराने सामान को दोबारा इस्तेमाल करने, उसकी मरम्मत करने और नए रूप में तैयार करने की सोच को दिखाती है। साथ ही यह ‘वेस्ट टू वेल्थ’ की अवधारणा को भी बढ़ावा देती है।

छोटे स्टेशनों पर बड़ी सुविधा

माताटीला, जीरोन, जखोरा और बसई जैसे छोटे स्टेशन आसपास के ग्रामीण और स्थानीय यात्रियों के लिए महत्वपूर्ण हैं। ऐसे स्थानों पर साफ और सुविधाजनक शौचालय की उपलब्धता यात्रियों के लिए बड़ी राहत हो सकती है।

खासकर महिलाओं, बच्चों, बुजुर्गों और दिव्यांग यात्रियों के लिए स्टेशन परिसर में ही शौचालय की सुविधा होना उपयोगी है। रेलवे का कहना है कि इस तरह की पहल से यात्री सुविधाओं के साथ-साथ संसाधनों की बचत और पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिलता है।

कबाड़ का सही इस्तेमाल बना मिसाल

झांसी की सीएमएलआर वर्कशॉप की यह पहल बताती है कि पुराने सामान को बेकार मानकर हटाने के बजाय सही तकनीक और सोच के साथ उसका दोबारा इस्तेमाल किया जा सकता है। रेलवे ने पुराने कोच पार्ट्स को नई उपयोगी सुविधा में बदलकर कम लागत, संसाधन बचत और यात्री सुविधा—तीनों को एक साथ साधने की कोशिश की है।

Join WhatsApp

Join Now

Join Telegram

Join Now