पूर्वांचल के सात जिलों में करीब 50 हजार ग्रामीण महिलाएं डिजिटल तकनीक के जरिए डेयरी कारोबार से जुड़ी हैं। दूध संग्रह, फैट जांच, रिकॉर्ड और भुगतान की प्रक्रिया को डिजिटल किए जाने से महिलाओं की कारोबारी भूमिका बढ़ी है। रिपोर्टों के मुताबिक करीब 12 हजार महिलाएं ‘लखपति दीदी’ बन चुकी हैं।
गांवों में डेयरी का तरीका बदला
पूर्वांचल के गांवों में डेयरी अब सिर्फ दूध उत्पादन तक सीमित नहीं रह गई है। वाराणसी, चंदौली, गाजीपुर, मिर्जापुर, सोनभद्र, भदोही और बलिया में Kashee Milk Producer Company Limited के नेटवर्क से जुड़ी महिलाएं दूध संग्रह से लेकर रिकॉर्ड और कारोबार प्रबंधन तक की जिम्मेदारी संभाल रही हैं।कंपनी के मुताबिक उसकी स्थापना नवंबर 2021 में महिलाओं को डेयरी के जरिए टिकाऊ आजीविका उपलब्ध कराने के उद्देश्य से हुई थी। मार्च 2022 से कंपनी ने “Dairy Value Chain Development in Eastern Uttar Pradesh” परियोजना के तहत काम शुरू किया। इस परियोजना में UPSRLM की वित्तीय सहायता और NDDB Dairy Services का तकनीकी सहयोग रहा।
मोबाइल ऐप से दर्ज हो रहा दूध का हिसाब
गांवों के दूध संग्रह केंद्रों पर डिजिटल उपकरणों से दूध की मात्रा और गुणवत्ता की जांच की जाती है। इसके बाद संबंधित जानकारी ‘काशी ई-डेयरी’ ऐप पर दर्ज की जाती है।इस डिजिटल व्यवस्था से दूध की मात्रा, फैट और भुगतान से जुड़े रिकॉर्ड को व्यवस्थित रखने में मदद मिलती है। 2026 की रिपोर्टों के अनुसार सात जिलों में इस नेटवर्क से जुड़ी महिलाएं रोजाना दो लाख लीटर से अधिक दूध के संग्रह और कारोबार में भूमिका निभा रही हैं।
हर 10 दिन में भुगतान का दावा
इस मॉडल में दूध बेचने वाले पशुपालकों को भुगतान सीधे बैंक खाते में भेजने की व्यवस्था है। भुगतान करीब हर 10 दिन में DBT के माध्यम से किए जाने की जानकारी दी गई है।इससे दूध की खरीद, भुगतान और रिकॉर्ड में पारदर्शिता बढ़ाने की कोशिश की गई है।
12 हजार महिलाएं बनीं ‘लखपति दीदी’
इस मॉडल की सबसे बड़ी उपलब्धियों में महिलाओं की बढ़ती आर्थिक भागीदारी बताई जा रही है। 2026 में प्रकाशित रिपोर्टों के मुताबिक नेटवर्क से जुड़ी करीब 12 हजार महिलाएं ‘लखपति दीदी’ बन चुकी हैं।‘लखपति दीदी’ का मतलब स्वयं सहायता समूह से जुड़ी ऐसी महिला से है, जिसकी सालाना पारिवारिक आय एक लाख रुपये से अधिक हो।अब कई महिलाएं केवल पशुपालन या दूध उत्पादन तक सीमित नहीं हैं। वे दूध संग्रह केंद्रों के संचालन, डिजिटल रिकॉर्ड और डेयरी कारोबार की दूसरी प्रक्रियाओं में भी सक्रिय भूमिका निभा रही हैं।
कौन-कौन से जिले शामिल हैं?
वर्तमान में Kashee Milk Producer Company का नेटवर्क पूर्वी उत्तर प्रदेश के इन सात जिलों में संचालित है-
- वाराणसी-
- चंदौली-
- गाजीपुर-
- मिर्जापुर-
- सोनभद्र-
- भदोही-
कंपनी की आधिकारिक वेबसाइट भी इन सात जिलों में अपने संचालन की पुष्टि करती है।
यह योजना नहीं, डेयरी मॉडल है
यहां एक बात साफ समझना जरूरी है। ‘डिजिटल डेयरी योजना’ नाम से कोई अलग सरकारी योजना बताकर आवेदन करने की बात सही नहीं होगी। यह Kashee Milk Producer Company के डेयरी नेटवर्क और उससे जुड़ी परियोजना का डिजिटल मॉडल है।इसी वजह से इस मॉडल से जुड़ने के लिए कोई अलग सरकारी ऑनलाइन आवेदन फॉर्म उपलब्ध होने की पुष्टि नहीं मिली है। यदि किसी गांव की महिला इस नेटवर्क से जुड़ना चाहती है, तो उसे अपने क्षेत्र के संबंधित दूध संग्रह केंद्र या Kashee Milk Producer Company से सदस्यता और उपलब्ध अवसरों की जानकारी लेनी होगी। कंपनी की आधिकारिक वेबसाइट पर वाराणसी कार्यालय का संपर्क नंबर 0542-4085526 और ईमेल info@kasheemilk.com दिया गया है।
महिलाओं के लिए बढ़ा कारोबार का दायरा
पूर्वांचल का यह मॉडल दिखाता है कि तकनीक के इस्तेमाल से ग्रामीण डेयरी कारोबार में महिलाओं की भूमिका किस तरह संग्रह केंद्र से लेकर डिजिटल रिकॉर्ड और कारोबार प्रबंधन तक बढ़ सकती है।दूध की मात्रा और गुणवत्ता की डिजिटल जानकारी, भुगतान का रिकॉर्ड और तकनीक आधारित प्रबंधन ने पारंपरिक डेयरी कारोबार को अधिक व्यवस्थित बनाने की दिशा में कदम बढ़ाया है। इसी मॉडल से जुड़ी महिलाओं की बढ़ती आय इसे ग्रामीण महिला सशक्तीकरण की एक महत्वपूर्ण मिसाल बना रही है।













