नई दिल्ली: जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच हुई झड़प तथा कथित बल प्रयोग के बाद आंदोलनकारी संगठन ने अपने आंदोलन को और तेज करने का फैसला किया है। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन के दौरान उनके साथ धक्का-मुक्की और बल प्रयोग किया गया। इसके विरोध में अब संसद भवन के बाहर चंद्रशेखर आजाद (रावण) ने धरना देने का ऐलान किया गया है। दूसरी ओर, दिल्ली पुलिस का कहना है कि प्रदर्शन के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक कार्रवाई की गई और हिंसा के आरोपों से इनकार किया।
क्या है पूरा मामला?
बीते दिनों जंतर-मंतर पर चल रहे आंदोलन के दौरान बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी संसद की ओर मार्च करने निकले। इस दौरान कई स्थानों पर पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव की स्थिति बनी। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि उन्हें रोकने के लिए बल प्रयोग किया गया, जबकि पुलिस का दावा है कि कुछ लोगों ने बैरिकेड तोड़ने और पथराव करने की कोशिश की, जिसमें सुरक्षाकर्मी भी घायल हुए।
संसद भवन के बाहर धरने का फैसला
आंदोलनकारी नेताओं ने कहा कि जंतर-मंतर पर हुई कथित बर्बरता के विरोध में अब संसद भवन के निकट शांतिपूर्ण धरना दिया जाएगा। उनका कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं होती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। प्रदर्शनकारियों ने सरकार से संवाद, कथित पुलिस कार्रवाई की निष्पक्ष जांच और आंदोलनकारियों की मांगों पर निर्णय लेने की मांग दोहराई है।
सरकार और पुलिस का पक्ष
केंद्रीय मंत्री जे.पी. नड्डा ने आंदोलन के प्रतिनिधियों से बातचीत की है। सरकार की ओर से संवाद जारी रखने की बात कही गई है। वहीं दिल्ली पुलिस ने सोशल मीडिया पर चल रहे कुछ आरोपों का खंडन करते हुए कहा कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक कदम उठाए गए और पुलिस द्वारा हिंसा किए जाने के दावों को सही नहीं माना जा सकता।
फिलहाल क्या स्थिति है?
दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। जंतर-मंतर पर प्रदर्शन जारी है और संसद क्षेत्र के आसपास अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है। आंदोलनकारी नेतृत्व ने कहा है कि उनका विरोध प्रदर्शन जारी रहेगा, जबकि प्रशासन ने लोगों से शांति बनाए रखने और निर्धारित सुरक्षा निर्देशों का पालन करने की अपील की है।













