सुप्रीम कोर्ट ने देश में बिना वैध बीमा वाले वाहनों की बढ़ती संख्या पर चिंता जताते हुए IRDAI और केंद्र सरकार को ‘नो इंश्योरेंस, नो फ्यूल’ मॉडल की व्यवहारिकता जांचने के लिए पायलट प्रोजेक्ट तैयार करने को कहा है। हालांकि, फिलहाल पूरे देश में ऐसा कोई नियम लागू नहीं हुआ है। जानिए सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा, यह पहल क्यों की गई और भविष्य में इसका वाहन मालिकों पर क्या असर पड़ सकता है।
नई दिल्ली: सड़क दुर्घटनाओं में पीड़ितों को समय पर मुआवजा दिलाने और बिना बीमा वाले वाहनों की संख्या कम करने के उद्देश्य से सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। अदालत ने भारतीय बीमा विनियामक एवं विकास प्राधिकरण (IRDAI) और सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) से कहा है कि वे मिलकर ऐसे मॉडल पर काम करें, जिसमें पेट्रोल पंपों पर ईंधन देने से पहले वाहन के वैध बीमा की जांच की जा सके। हालांकि, अदालत ने यह भी स्पष्ट किया है कि अभी पूरे देश में “बिना इंश्योरेंस, नहीं मिलेगा पेट्रोल-डीजल” जैसा कोई नियम लागू नहीं किया गया है। फिलहाल केवल इस व्यवस्था की व्यवहारिकता जानने के लिए पायलट प्रोजेक्ट तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं।
क्या है पूरा मामला?
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि देश में बड़ी संख्या में वाहन बिना वैध थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस के सड़कों पर चल रहे हैं। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, भारत में लगभग 30.48 करोड़ पंजीकृत वाहनों में से 16.54 करोड़ वाहनों के पास वैध बीमा नहीं है। यानी आधे से अधिक वाहन बिना जरूरी बीमा के सड़क पर चल रहे हैं। अदालत का मानना है कि यह स्थिति सड़क सुरक्षा के साथ-साथ दुर्घटना पीड़ितों के अधिकारों पर भी असर डालती है। कई मामलों में दुर्घटना के बाद मुआवजा मिलने में देरी या कठिनाई का कारण वाहन का बीमा न होना बन जाता है।
सुप्रीम कोर्ट ने क्या निर्देश दिए?
सुप्रीम कोर्ट ने IRDAI और केंद्र सरकार को ऐसी व्यवस्था तैयार करने के लिए कहा है, जिससे बिना बीमा वाले वाहनों की पहचान आसान हो सके। इसके लिए अदालत ने कई सुझाव भी दिए हैं।
- पेट्रोल पंपों पर वाहन का बीमा सत्यापित करने की व्यवस्था विकसित की जाए।
- इस व्यवस्था की जांच के लिए पहले एक पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया जाए।
- ANPR (ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन) तकनीक का उपयोग कर वाहन की जानकारी और बीमा की स्थिति की जांच की जाए।
- VAHAN पोर्टल और बीमा कंपनियों के डेटाबेस को आपस में जोड़ा जाए।
- बिना वैध बीमा वाले वाहनों की पहचान कर उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की प्रभावी व्यवस्था बनाई जाए।
क्या अब बिना इंश्योरेंस पेट्रोल-डीजल नहीं मिलेगा?
नहीं। फिलहाल देश में ऐसा कोई नियम लागू नहीं किया गया है, जिसके तहत बिना वैध बीमा वाले वाहन को पेट्रोल या डीजल देने पर रोक हो। सुप्रीम कोर्ट ने केवल इस मॉडल की संभावनाओं का परीक्षण करने के लिए पायलट प्रोजेक्ट तैयार करने का निर्देश दिया है। यदि भविष्य में यह व्यवस्था सफल साबित होती है और सरकार इसे मंजूरी देती है, तभी इसे चरणबद्ध तरीके से लागू किया जा सकता है। इसलिए अभी वाहन चालकों को घबराने की जरूरत नहीं है।
कोर्ट ने यह कदम क्यों उठाया?
सुप्रीम कोर्ट का कहना है कि हर साल देश में बड़ी संख्या में सड़क दुर्घटनाएं होती हैं। ऐसे मामलों में यदि दुर्घटना करने वाले वाहन का वैध बीमा नहीं होता, तो पीड़ितों को मुआवजा मिलने में काफी परेशानी होती है। अदालत का मानना है कि यदि सभी वाहनों का बीमा सुनिश्चित किया जाए, तो दुर्घटना पीड़ितों को न्याय मिलने की प्रक्रिया अधिक प्रभावी और तेज हो सकती है। इसी उद्देश्य से तकनीक आधारित व्यवस्था विकसित करने पर जोर दिया गया है।
आम लोगों पर क्या असर पड़ सकता है?
यदि भविष्य में यह व्यवस्था लागू होती है, तो वाहन मालिकों को अपने वाहन का बीमा समय पर नवीनीकृत कराना होगा। बिना वैध बीमा वाले वाहनों को ईंधन मिलने में दिक्कत आ सकती है। इससे सड़क पर बिना बीमा वाले वाहनों की संख्या घट सकती है और दुर्घटना होने की स्थिति में पीड़ितों को मुआवजा मिलने की प्रक्रिया भी बेहतर हो सकती है। साथ ही वाहन मालिकों में समय पर बीमा कराने की जागरूकता बढ़ने की उम्मीद है।
क्या यह नियम पूरे भारत में लागू होगा?
फिलहाल इसका जवाब नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने केवल पायलट प्रोजेक्ट तैयार करने के निर्देश दिए हैं। अभी सरकार ने पूरे देश में “नो इंश्योरेंस, नो फ्यूल” नियम लागू करने की कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की है। यदि पायलट प्रोजेक्ट के नतीजे सकारात्मक रहते हैं, तो सरकार भविष्य में इसे कुछ राज्यों या शहरों में लागू करने पर विचार कर सकती है। उसके बाद ही इसे राष्ट्रीय स्तर पर लागू करने का फैसला लिया जाएगा।













