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सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद आवारा कुत्तों का आतंक, कहीं मौत तो कहीं गंभीर हमले

देश के अलग-अलग हिस्सों से सामने आ रही आवारा कुत्तों के हमलों की घटनाओं ने लोगों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है।

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नई दिल्ली: आवारा कुत्तों के हमलों की लगातार सामने आ रही घटनाओं ने देश के कई हिस्सों में लोगों की चिंता बढ़ा दी है। कहीं खेत में काम करने गए किसान की जान चली गई, कहीं चार साल की बच्ची गंभीर रूप से घायल हो गई, तो कहीं कुछ ही घंटों में बड़ी संख्या में लोग Dog Bite का शिकार हुए। इन घटनाओं के बीच आवारा कुत्तों के प्रबंधन और सार्वजनिक स्थानों पर लोगों की सुरक्षा को लेकर प्रशासन की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं।

सुप्रीम कोर्ट भी इस मुद्दे पर पहले ही गंभीर चिंता जता चुका है। कोर्ट के निर्देशों में educational institutions, hospitals, sports complexes, railway stations और bus depots जैसे institutional areas में stray dogs की मौजूदगी को रोकने के लिए जरूरी कदम उठाने की बात कही गई है। कोर्ट ने ऐसे परिसरों से कुत्तों को हटाकर designated shelters में रखने तथा Animal Birth Control Rules, 2023 के तहत sterilisation और vaccination की व्यवस्था करने के निर्देश दिए हैं।

मेरठ में आवारा कुत्तों के हमले में किसान की मौत

उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले के जानी थाना क्षेत्र के किठौली गांव में करीब 58 वर्षीय किसान लख्मी की आवारा कुत्तों के हमले में मौत हो गई। रिपोर्टों के मुताबिक, किसान खेत में ईख की बंधाई के लिए गए थे। काफी देर तक घर वापस नहीं लौटने पर परिवार के लोगों को चिंता हुई और उनकी तलाश शुरू की गई। बाद में खेत में किसान की मौत की जानकारी सामने आई। घटना के बाद ग्रामीणों में आवारा कुत्तों को लेकर डर और नाराजगी का माहौल बना हुआ है। ग्रामीणों की मांग है कि गांव और खेतों के आसपास घूमने वाले कुत्तों की समस्या का स्थायी समाधान किया जाए।

चार साल की बच्ची पर सात कुत्तों का हमला

महाराष्ट्र के पिंपरी इलाके में एक चार साल की बच्ची पर आवारा कुत्तों के झुंड ने हमला कर दिया। रिपोर्ट के अनुसार, करीब सात कुत्तों के हमले में बच्ची गंभीर रूप से घायल हुई। इलाज के दौरान उसके सिर पर 80 से ज्यादा टांके लगाए जाने की जानकारी सामने आई। घटना ने एक बार फिर बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है। खासकर उन इलाकों में जहां कुत्तों के झुंड अक्सर दिखाई देते हैं, वहां अभिभावकों के बीच डर का माहौल बना रहता है।

कल्याण में बड़ी संख्या में Dog Bite के मामले

महाराष्ट्र के ठाणे जिले के कल्याण पश्चिम इलाके में भी आवारा कुत्ते के हमले को लेकर दहशत फैल गई। स्वास्थ्य अधिकारियों के मुताबिक, कई घंटों के दौरान बड़ी संख्या में लोग Dog Bite के इलाज के लिए अस्पताल पहुंचे। रिपोर्टों में करीब 130 लोगों के प्रभावित होने का आंकड़ा सामने आया, जबकि अस्पताल के रिकॉर्ड में अलग-अलग दिनों में दर्ज मामलों की संख्या अलग बताई गई है। घटना के बाद स्थानीय प्रशासन और नगर निगम की टीमों ने इलाके में कार्रवाई की। इस मामले ने शहर में stray dogs की मौजूदगी और लोगों की सुरक्षा को लेकर चिंता को और बढ़ा दिया।

रायबरेली में कुत्ते के काटने के बाद बुजुर्ग की मौत

उत्तर प्रदेश के रायबरेली में भी कुत्ते के काटने के बाद एक बुजुर्ग की मौत का मामला सामने आया। रिपोर्ट के मुताबिक, कुत्ते के काटने के बाद बुजुर्ग की तबीयत बिगड़ गई और स्वास्थ्य विभाग की जांच में रेबीज संक्रमण को मौत का कारण बताया गया। यह घटना इस बात की ओर भी ध्यान दिलाती है कि Dog Bite के मामलों में केवल हमले से हुई चोट ही चिंता का विषय नहीं होती, बल्कि संक्रमण का खतरा भी गंभीर हो सकता है। ऐसे मामलों में समय पर चिकित्सा सहायता और आवश्यक उपचार बेहद महत्वपूर्ण होता है।

सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बीच जागरूकता की पहल

आवारा कुत्तों के हमलों को लेकर बढ़ती चिंता के बीच दिल्ली के श्री अरबिंदो कॉलेज में भी जागरूकता की पहल देखने को मिली। कॉलेज में ‘Paws & Protect’ नाम से Animal Safety और Dog Bite Prevention पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कॉलेज से जुड़ी जानकारी के मुताबिक, कार्यक्रम का उद्देश्य लोगों को जानवरों के आसपास सुरक्षित व्यवहार और Animal Bite की स्थिति में जरूरी सावधानियों के बारे में जागरूक करना था। कार्यक्रम में जागरूकता गतिविधियों के जरिए यह संदेश देने की कोशिश की गई कि कुत्तों के साथ सुरक्षित व्यवहार करना, उन्हें अनावश्यक रूप से परेशान या उकसाने से बचना और काटने की स्थिति में तुरंत उचित प्राथमिक उपचार व चिकित्सा सहायता लेना जरूरी है। इस तरह की पहल इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों में स्कूलों और educational institutions में छात्रों और कर्मचारियों के लिए animals के आसपास preventive behaviour, bite की स्थिति में first-aid और immediate reporting protocols को लेकर awareness sessions आयोजित करने की बात कही गई है।

आदेश और जमीन पर कार्रवाई के बीच कितना अंतर?

सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बावजूद अलग-अलग शहरों से सामने आ रही Dog Bite की घटनाएं यह सवाल खड़ा करती हैं कि सार्वजनिक स्थानों पर stray dogs की समस्या को नियंत्रित करने के लिए जमीनी स्तर पर कितनी प्रभावी व्यवस्था मौजूद है। कोर्ट ने institutional areas में stray dogs के प्रवेश और रहने को रोकने के साथ-साथ स्थानीय निकायों को आवश्यक व्यवस्था करने के निर्देश दिए हैं। वहीं, अस्पतालों में anti-rabies vaccine और immunoglobulin की उपलब्धता सुनिश्चित करने तथा educational institutions में awareness programmes चलाने पर भी जोर दिया गया है।

सिर्फ कार्रवाई नहीं, जागरूकता भी जरूरी

आवारा कुत्तों की समस्या का समाधान केवल उन्हें एक जगह से हटाने तक सीमित नहीं है। नियमों के तहत sterilisation और vaccination जैसी व्यवस्थाओं के साथ सार्वजनिक स्थानों की सुरक्षा, नियमित निगरानी और लोगों में जागरूकता भी जरूरी है। मेरठ में किसान की मौत, महाराष्ट्र में बच्ची के घायल होने, कल्याण में बड़ी संख्या में Dog Bite के मामले और रायबरेली में रेबीज से बुजुर्ग की मौत जैसी घटनाएं इस समस्या की गंभीरता दिखाती हैं। वहीं, श्री अरबिंदो कॉलेज जैसी संस्थाओं की जागरूकता पहल यह बताती है कि प्रशासनिक कदमों के साथ लोगों को सुरक्षित व्यवहार और Dog Bite Prevention के बारे में जानकारी देना भी जरूरी है। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों को कितनी गंभीरता से लागू किया जाता है और क्या सार्वजनिक स्थानों पर लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए स्थानीय प्रशासन नियमित और प्रभावी कार्रवाई करता है।

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