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नेपाल में बाढ़ का कहर, 359 की मौत; 1400 से ज्यादा लापता

Nepal flood
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नेपाल-तिब्बत सीमा पर 26 अगस्त को आई भीषण फ्लैश फ्लड ने बड़े इलाके में तबाही मचा दी। ग्लेशियर के टूटने और उसके बाद पानी व मलबे के तेज बहाव से गांव, सड़कें, पुल और दूसरी सुविधाएं बर्बाद हो गईं। 27 अगस्त तक नेपाल पुलिस ने 359 मौतों की पुष्टि की है, जबकि 1,400 से ज्यादा लोग लापता बताए जा रहे हैं। इनमें विदेशी पर्यटक और कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए भारतीय भी शामिल हैं।

हिमालय में कुदरत का कहर, नेपाल-तिब्बत सीमा पर सब कुछ बहा

26 अगस्त की सुबह नेपाल के रसुवा जिले के रसुवागढ़ी-टिमुरे इलाके में अचानक पानी और मलबे का ऐसा सैलाब आया कि लोगों को संभलने का मौका तक नहीं मिला। भोटे कोशी नदी में अचानक आई बाढ़ ने आसपास के इलाकों को अपनी चपेट में ले लिया।पानी के साथ पत्थर, मिट्टी और चट्टानों का मलबा इतनी तेजी से नीचे आया कि रास्ते में आने वाली कई संरचनाएं इसकी चपेट में आ गईं। नेपाल के अलावा चीन के तिब्बत क्षेत्र में भी इसका गंभीर असर हुआ।

आखिर इतनी बड़ी बाढ़ आई कैसे?

शुरुआती घंटों में घटना को भूकंप से जोड़कर देखा गया था, लेकिन बाद के वैज्ञानिक विश्लेषण में सामने आया कि मुख्य वजह ग्लेशियर का टूटना और उसके बाद हुआ मलबे का तेज बहाव था।ग्लेशियर से बर्फ और चट्टानों का बड़ा हिस्सा नीचे आया। इससे पानी और मलबे की मात्रा अचानक बढ़ गई और नदी का बहाव बेहद खतरनाक हो गया। अमेरिकी भूगर्भीय सर्वेक्षण समेत वैज्ञानिक विश्लेषणों ने भी घटना को ग्लेशियर से जुड़े मलबे के बहाव से जोड़ा है।

मौत का आंकड़ा 359 तक पहुंचा

27 अगस्त को नेपाल पुलिस के अपडेट के मुताबिक बाढ़ में 359 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है। मृतकों के शव नेपाल के कई जिलों से बरामद किए गए हैं।हालांकि राहत और तलाश का काम अभी जारी है, इसलिए मृतकों की संख्या और बढ़ने की आशंका बनी हुई है।

1,400 से ज्यादा लोग अभी भी लापता

इस हादसे का सबसे बड़ा सवाल लापता लोगों को लेकर है। रिपोर्टों के मुताबिक 1,400 से ज्यादा लोग अब भी लापता हैं।कई प्रभावित इलाकों से संपर्क टूट गया है और कुछ जगहों तक सड़क से पहुंचना संभव नहीं है। ऐसे में प्रशासन को हर लापता व्यक्ति की जानकारी जुटाने और उसकी स्थिति की पुष्टि करने में परेशानी हो रही है।

भारतीयों के लिए भी बढ़ी चिंता

इस हादसे में बड़ी संख्या में भारतीय नागरिकों के प्रभावित होने की खबर सामने आई है। कई भारतीय नेपाल के रास्ते कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए थे।शुरुआती सूची में 100 से ज्यादा भारतीयों के लापता या संपर्क से बाहर होने की जानकारी सामने आई थी। बाद के अपडेट में आंकड़े और बदले हैं, इसलिए भारतीय नागरिकों की संख्या को लेकर आधिकारिक पुष्टि का इंतजार करना जरूरी है।कई भारतीय पर्यटक और तीर्थयात्री नेपाल-तिब्बत सीमा के आसपास फंसे हुए थे। परिवार लगातार अपने लोगों से संपर्क करने की कोशिश कर रहे हैं।

कैलाश मानसरोवर यात्रा पर भी पड़ा असर

बाढ़ उस रास्ते पर आई है जिसका इस्तेमाल कैलाश मानसरोवर जाने वाले कई यात्री करते हैं। रसुवागढ़ी बॉर्डर के आसपास अचानक आई बाढ़ के कारण यात्रा मार्ग बुरी तरह प्रभावित हुआ।नेपाल पर्यटन बोर्ड की शुरुआती सूची में करीब 384 यात्रियों के संपर्क से बाहर होने की जानकारी सामने आई थी, जिनमें विदेशी नागरिक और नेपाली नागरिक दोनों शामिल थे।कैलाश मानसरोवर यात्रा के कारण इस हादसे का असर सिर्फ स्थानीय लोगों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि कई देशों के पर्यटक और तीर्थयात्री भी इसकी चपेट में आ गए।

सिर्फ नेपाल नहीं, तिब्बत भी प्रभावित

बाढ़ का असर सीमा पार चीन के तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र के ग्यिरोंग इलाके में भी हुआ। वहां भी लोगों की मौत हुई और बड़ी संख्या में लोग लापता बताए गए हैं।नेपाल और चीन की एजेंसियां अपने-अपने इलाकों में राहत और बचाव अभियान चला रही हैं।

हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट भी नुकसान की चपेट में

भोटे कोशी और आसपास के नदी क्षेत्र में मौजूद जलविद्युत परियोजनाओं और दूसरे बुनियादी ढांचे को भी नुकसान पहुंचने की खबर है।तेज पानी और मलबे ने बिजली से जुड़ी कई सुविधाओं को प्रभावित किया, जिससे राहत कार्य के साथ-साथ सामान्य जनजीवन बहाल करना भी बड़ी चुनौती बन गया है।

भारत ने मदद का हाथ बढ़ाया

भारत ने नेपाल में राहत और बचाव के लिए सहायता भेजी है। भारतीय एजेंसियां नेपाल में प्रभावित भारतीय नागरिकों की जानकारी जुटाने और उनके परिवारों से संपर्क कराने में भी लगी हैं।भारत की ओर से राहत सामग्री और जरूरी सामान भेजे जाने की जानकारी सामने आई है।

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