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बुलडोजर एक्शन: आवासीय इलाकों में चल रहे कारोबार पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, बुलडोजर एक्शन की तैयारी

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नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने आवासीय इलाकों में नियमों के खिलाफ चल रही व्यावसायिक गतिविधियों यानी कि आवासीय इलाकों पे रहने के बजाय गैर आवासीय गतिविधियों को लेकर और अवैध निर्माण को लेकर सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट के निर्देश के बाद अलग-अलग शहरों में ऐसे मामलों की पहचान और जांच की जा रही है। नियमों का उल्लंघन मिलने पर नोटिस, सीलिंग और जरूरत पड़ने पर अवैध निर्माण हटाने यानी बुलडोजर एक्शन जैसी कार्रवाई हो सकती है।

आखिर आवासीय इलाकों में कारोबार पर क्यों बढ़ी सख्ती?

कई जगह आवासीय इलाकों में दुकान, ऑफिस, रेस्टोरेंट, क्लिनिक या दूसरी व्यावसायिक गतिविधियां चल रही हैं, जिन्हें मुख्य रूप से घरों के लिए तय किया गया है। कुछ मामलों में बिना जरूरी अनुमति के निर्माण भी किए गए हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने ऐसे मामलों की पहचान करने और नियमों के मुताबिक कार्रवाई करने को कहा है। इसका मकसद यह देखना है कि जिस जमीन का इस्तेमाल जिस काम के लिए तय किया गया है, उसका उसी तरह इस्तेमाल हो।

पहले होगा सर्वे, फिर नियम के मुताबिक कार्रवाई

सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद सारे संबंधित नगर निकाय और विकास प्राधिकरण ऐसे मामलों का सर्वे कर रहे हैं। इसमें यह देखा जाएगा कि कौन-सी संपत्ति में नियमों के खिलाफ निर्माण या व्यावसायिक गतिविधि चल रही है।अगर कोई उल्लंघन मिलता है तो संबंधित व्यक्ति को नोटिस दिया जा सकता है और नियमों के अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।

बुलडोजर कहां चलेगा?

सुप्रीम कोर्ट के नियमों के अनुसार यहां यह समझना जरूरी है कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देश का मतलब हर घर पर बुलडोजर चलाना नहीं है। अगर किसी इमारत का कोई हिस्सा अवैध तरीके से बनाया गया है और कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद उसे हटाने का आदेश दिया जाता है, तभी उस अवैध हिस्से को तोड़ने जैसी कार्रवाई हो सकती है। यानी इस पूरे मामले का फोकस “बुलडोजर” से ज्यादा यह सुनिश्चित करना है कि आवासीय जमीन का इस्तेमाल नियमों के खिलाफ न हो और अवैध निर्माण पर कानून के मुताबिक कार्रवाई हो।

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