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बिहार की राजधानी पटना में PM मोदी के नाम पर मंदिर बनाने का प्रस्ताव, ट्रांसजेंडर वेलफेयर बोर्ड ने लिया बड़ा फैसला

बिहार की राजधानी पटना में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम पर मंदिर बनाने का प्रस्ताव सामने आया है

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बिहार की राजधानी पटना में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम पर मंदिर बनाने का प्रस्ताव सामने आया है। बिहार राज्य ट्रांसजेंडर वेलफेयर बोर्ड की पहली बैठक में इस प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। बोर्ड का कहना है कि प्रधानमंत्री द्वारा ट्रांसजेंडर समुदाय के अधिकारों और कल्याण के लिए उठाए गए कदमों के सम्मान में यह पहल की गई है। हालांकि, मंदिर निर्माण फिलहाल केवल प्रस्ताव के स्तर पर है और इसके लिए राज्य सरकार से भूमि आवंटन व अन्य प्रशासनिक स्वीकृतियां मिलना बाकी है।

ट्रांसजेंडर समुदाय ने जताया सम्मान, बोर्ड ने सर्वसम्मति से पारित किया प्रस्ताव

पटना में आयोजित बिहार राज्य ट्रांसजेंडर वेलफेयर बोर्ड की पहली बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम पर मंदिर बनाने का प्रस्ताव रखा गया, जिसे सभी सदस्यों ने सर्वसम्मति से मंजूरी दे दी। बोर्ड का कहना है कि केंद्र सरकार द्वारा ट्रांसजेंडर समुदाय के अधिकारों की सुरक्षा, कानूनी पहचान और सामाजिक समावेशन के लिए उठाए गए कदमों ने समुदाय के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाया है। इसी भावना के तहत प्रधानमंत्री के सम्मान में मंदिर निर्माण का प्रस्ताव पारित किया गया।

भूमि मिलने के बाद शुरू होगी आगे की प्रक्रिया, सरकार से होगी मांग

बोर्ड ने निर्णय लिया है कि मंदिर निर्माण के लिए बिहार सरकार से उपयुक्त भूमि उपलब्ध कराने का अनुरोध किया जाएगा। यदि सरकार भूमि आवंटित करती है, तो उसके बाद मंदिर की रूपरेखा, निर्माण समिति, वित्तीय व्यवस्था और भूमि पूजन सहित अन्य प्रक्रियाएं शुरू की जाएंगी। फिलहाल सरकार की ओर से इस प्रस्ताव पर कोई आधिकारिक फैसला सामने नहीं आया है, इसलिए मंदिर निर्माण अभी प्रारंभिक चरण में ही है।

प्रस्ताव पर शुरू हुई बहस, समर्थकों ने सराहा तो विपक्ष ने उठाए सवाल

मंदिर निर्माण का प्रस्ताव सामने आते ही बिहार की राजनीति और सामाजिक संगठनों में चर्चा तेज हो गई है। समर्थकों का कहना है कि यह प्रधानमंत्री के प्रति सम्मान व्यक्त करने की एक पहल है, जबकि विपक्षी दलों ने इसे राजनीतिक कदम बताते हुए इसकी आवश्यकता पर सवाल उठाए हैं। इस बीच विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक राज्य सरकार भूमि आवंटन और प्रशासनिक मंजूरी नहीं देती, तब तक यह योजना केवल एक प्रस्ताव ही मानी जाएगी।

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